Sunday, 20 March 2016

तुलसी-जल


   
    गर्मी का आगमन हो रहा है। लोग अधिक-से-अधिक लिक्विड लेना पसंद करते हैं। शीतल पेय की दुकानें बाजार में सजने लगी हैं। कई खुलासों से बार-बार पता चलता रहता है कि शीतल-पेय के नाम पर पता नहीं क्या-क्या बेंचा जा रहा है। आज मैंने अपनी टेस्टफुल मेनू में एक शीतल पेय रखा है। इस पेय के साथ बड़े आत्म-विश्वास से दावा किया जा सकता है कि आपको किसी भी प्रकार हानि नहीं, लाभ होगा।
    जी हाँ, आज मैंने अपनी टेस्टफुल मेनू में 'तुलसी-जल' रखा है। आप तो जानते ही है की भारतीय पृष्ठभूमि के परिवारों में बरसों से परंपरा चली आ रही है कि घर में तुलसी का पौधा अवश्य होना चाहिए। सभी धार्मिक-पौराणिक ग्रंथ-शास्त्रों में तुलसी को पवित्र, पूजनीय, शुद्ध और देवी स्वरूप माना गया है। तुलसी का प्रतिदिन दर्शन करना पाप-नाशक व मोक्षदायक माना गया है। इतना ही नहीं, विज्ञान की दृष्टिकोण से भी तुलसी एक औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी तथा उसके विभिन्न औषधीय प्रयोगों का विशेष स्थान हैं। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बूटी के समान माना जाता है। हृदय रोग हो या सर्दी जुकाम, भारत में सदियों से तुलसी का इस्तेमाल होता चला आ रहा है। तुलसी के पत्तों का नियमित रूप से सेवन करने से अनेकानेक बीमारियाँ ठीक हो जाती है। मानसिक शांति देने वाले तुलसी के सेवन से स्मरण शक्ति, हृदय रोग, कफ, श्वास के रोग, ख़ून की कमी, खाँसी, जुकाम, दमा, दंत रोग, धवल रोग आदि में चमत्कारी लाभ मिलता है। तुलसी शरीर का शोधन करती है, वातावरण का शोधन करती है तथा पर्यावरण के साथ संतुलन बनाती है। 
    तुलसी प्रकृति की अनूठी देन है। इसकी जड़, तना, पत्तियां तथा बीज उपयोगी होते हैं। रासायनिक द्रव्यों एवं गुणों से भरपूर, मानव हितकारी तुलसी रूखी गर्म उत्तेजक, रक्त शोधक, कफ व शोधहर चर्म रोग निवारक एवं बलदायक होती है। तो आइये आज मैं गर्मी-स्पेशल 'तुलसी-जल' के विषय में बताऊँगी। 
तुलसी-जल के लिए आवश्यक सामग्री -
  • तुलसी का रस - 1 चम्मच (4-5 पत्तों का)
  • नींबू का रस - 1/2 चम्मच
  • बर्फ - 2-3 क्यूब 
  • जलजीरा - 1/2 चम्मच
  • साफ पानी - 1 गिलास 
  • नमक - स्वादानुसार 

तुलसी-जल कैसे बनाएँ?
  • सबसे पहले एक गिलास से थोड़ा कम स्वच्छ पानी लें। 
  • पानी में तैयार 1/2 चम्मच नींबू का रस डालें। 
  • अब 1/2 चम्मच जलजीरा डालें। 
  • स्वादानुसार नमक डाल लें। 
  • अब तुलसी के 4-5 पत्तों को पीसकर पहले से तैयार किया गया एक चम्मच तुलसी का रस डालें। 
  • अब सभी मिश्रण को मिला लें। 
  • मिलाने के बाद गिलास में  बर्फ का क्यूब डालें और पीने के लिए दें। 
  • अब आपकी टेस्टफुल मेनू के लिए एकदम कूल 'तुलसी-जल' तैयार है। 

विशेष - 
  • तुलसी की प्रकृति गर्म है, इसलिए गर्मी गर्मी में इसे दही, छाछ या बर्फ के साथ लेना चाहिए। 
  • तुलसी-जल के सेवन के बाद कुछ देर तक दूध भूलकर भी ना पियें, चर्म रोग हो सकता है। 
  • तुलसी रस को शहद साथ में ना लें, क्योंकि गर्म वस्तु के साथ शहद विष तुल्य हो जाता है। 
  • तुलसी के साथ दूध, मूली, नमक, प्याज, लहसुन, मांसाहार, खट्टे फल ये सभी का सेवन करना हानिकारक है। 
  • तुलसी के पत्ते दांतो से चबाकर ना खायें, अगर खायें हैं तो तुरंत कुल्ला कर लें। कारण इसका अम्ल दांतों के एनेमल को ख़राब कर देता है। 
  • लाभ की लालसा में तुलसी-जल एक बार में अधिक मात्रा में ना लें। 

                                               
 
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Thursday, 10 March 2016

बाकला की सब्जी


    बाकला एक वार्षिक पौधा है, जो कि मीज़ो अमरीका और एंडीज़ पर्वत पर मूलतः उगता था। अब यह विश्व भर में उगाया जाता है। बाकला को विलायती सेम, बल्लर बाबरी के अतिरिक्त मराठी में श्रावण घेवड़ा तथा अंग्रेजी में कामन फ्रेंच या किडनी बीन्स कहते हैं। यह एक फली है जिसकी सब्जी बनती है। मूलतः यह एक दलहन है, लेकिन इसके हरी फली की स्वादिष्ट व शुद्ध देशी सब्जी बनती है। 
    बाकला की खेती रबी के मौसम में नम मिटटी में होता है। बाकला की ताजी फली की सब्जी से पुष्टि प्राप्त होती है। वैज्ञानिक इसे प्रोटीन का खजाना भी कहते हैं। कई जगह इसके सूखे और ताजे बीजों की भी सब्जी बनाई जाती है। इसका दाल भी स्वादिष्ट  तथा तो व्रतों में फलाहार के रूप में भी उपयोग करते हैं। पूरे विश्व में उगाई जाने वाली दलहनी फसलों में बाकला का स्थान चौथा है। 

    आज मैंने अपनी टेस्टफुल मेनू में बाकला की सब्जी रखा है। इस सब्जी की रेसिपी मैंने बदलते मौसम को देखकर रखा है। इस मार्च-अप्रैल के मौसम में मैंने इसे सरसों डालकर बनाया है। यह एक सुपाच्य और स्वादिष्ट रेसिपी है। 
बाकला की सब्जी के लिए आवश्यक सामग्री -
  • बाकला की फली - 200 ग्राम 
  • सरसों - 50 ग्राम (पेस्ट)
  • सरसों - 8-10 दाना 
  • लहसून - 5-6 कली 
  • हरी मिर्च - 2-3 
  • हल्दी पाउडर - 1/2 चम्मच 
  • तेल - 2 चम्मच 
  • नमक - स्वादानुसार 

बाकला की सब्जी कैसे बनाएँ?
  • बाकला की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले फली को साफ धो लें। 
  • अब फली के दोनों किनारों को तोड़ते हुए उसके रेशे निकालकर साफ कर लें। 
  • अब सब्जी में डालने के लिए मसाला तैयार करें। 
  • मसाला तैयार करने के लिए सबसे पहले मिक्सी में सरसों को पीसकर पेस्ट बनाएँ। 
  • अब उसी पेस्ट में हरी मिर्च और लहसून डालकर पुनः पेस्ट बनाएँ। 
  • अब कढा़ई में तेल गरम करके सरसों के 8-10 दाने डालकर चटकने दें। 
  • चटकने के बाद बाकला की फली को कढ़ाई में डालकर 2 मिनट भूनें। 

  • अब तैयार किए गए मसाले के पेस्ट को डालकर खूब चलाएँ। 
  • अब हल्दी-पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर मिला लें। 
  • मिलाने के बाद ढककर पकने दें तथा थोड़ी-थोड़ी देर पर चलाते रहें। 
  • 2-3 मिनट के बाद आधा कप पानी डालकर ढक दें तथा 5 मिनट पकने दें। 
  • अब आपकी टेस्टफुल मेनू के लिए शुद्ध देशी स्वाद से भरपूर बाकला की सब्जी तैयार है। 

   
इसे चाहें तो आप सूखा भी बना सकते हैं और एक नई सब्जी का आनंद ले सकते हैं।
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Tuesday, 8 March 2016

हरी मटर की दाल



हरी मटर की दाल जिसे पूर्वी उत्तर प्रदेश में निमोना भी कहते हैं, एक लोकप्रिय दाल है। हरे मटर के दानों का खाने में भिन्न-भिन्न प्रकार से उपयोग किया जाता है, मगर इसके दाल की अलग ही बात है। आमतौर पर ये जाड़ों के मौसम में बनता है क्योंकि तब हरी मटर आसानी से उपलब्ध होती है। आज मैंने अपनी टेस्टफुल मेनू में हरी मटर की दाल रखी है। कभी आप भी बनाकर देखिए, खाने और खिलाने, दोनों में मज़ा आएगा। 

हरी मटर की दाल के लिए आवश्यक सामग्री -
  • हरी मटर के दाने - एक कप
  • तेल - 2-3 चम्मच 
  • टमाटर - 2
  • हरी मिर्च - 2
  • अदरक - 1 इंच लम्बा टुकड़ा
  • लहसून - 4-5 कली  
  • तेजपत्ता - 2-3
  • हींग - 1 पिंच
  • जीरा - 1/5 चम्मच
  • धनिया पाउडर - 1 छोटी चम्मच
  • लाल मिर्च पाउडर - 1/5 चम्मच
  • गरम मसाला - 1/5 चम्मच
  • नमक - स्वादानुसार 

हरी मटर की दाल कैसे बनाएँ?
  • सबसे पहले हरे मटर के दानों को अच्छे से धो लें। 
  • टमाटर को धो लें और उसे बडे़-बडे़ टुकडों में काट लें।  
  • हरी मिर्च का डंठल हटा लें और अदरक को छील कर इन्हें भी धो लें।  
  • टमाटर और हरी मिर्च को मिक्सी में डाल कर बारीक पीस लें।  
  • इसी तरह मटर को भी अलग से दरदरा पीस कर एक अलग प्याले में निकाल लें।  
  • अदरक और लहसून को बारीक काट लें। 

  • कढा़ई में तेल गरम करके तेजपत्ता, हींग और जीरा डाल लें। 
  • अब धनिया पाउडर, अदरक और टमाटर वाला पिसा हुआ पेस्ट डाल कर अच्छे से भूनें। 
  • अब आप मसाले को तेल छोड़ने या दानेदार होने तक भूनें। 
  • जब मसाला अच्छे से भुन जाए तो इसमें पिसे हुए मटर डालें और इसे चलाते हुए 3-4 मिनट तक भून लें।  
  • अब आप अपनी पसंद के अनुसार तरी के लिए पानी डाल लें। 
  • अब गरम मसाला, नमक और लाल मिर्च डाल कर मिलाएँ और सब्ज़ी में उबाल आने तक पकाएँ। 
  • जब दाल में उबाल आ जाए तो इसे 8-10 मिनट और पका कर गैस बंद कर दें।  

अब आपकी टेस्टफुल मेनू के लिए गरमागरम और स्वादिष्ट हरी मटर की दाल तैयार है। 

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Monday, 7 March 2016

बेर से कैसा बैर?


    आप सबको पता ही होगा कि बेर भारत का बहुत ही प्राचीन एंव लोकप्रिय फल है। यह विटामिन 'सी' व विटामिन 'बी' का अच्छा स्त्रोत है। इसमें कैल्शियम, लौह और शर्करा प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। बेर के फल, पत्ती, वृक्ष की छाल, गोंद आदि में उच्च-कोटि का औषधीय गुण है। इसे भगवान शिव का प्रिय फल भी कहा जाता है। इसीलिए लोग महाशिवरात्रि की पूजा में प्रसाद के लिए चढ़ाते भी हैं, खाते भी हैं। आज मैंने भी अपनी टेस्टफुल मेनू में इस गुणों के खान बेर को रखा है। 
बेर के फायदे 
  • रोजाना बेर खाने से अस्थमा और मसूड़ों के घाव को भरने में मदद मिलती है। 
  • बेर खाने से खुश्की और थकान दूर होती है। 
  • बेर और नीम के पत्ते पीसकर सिर पर लगाने से बालों का झड़ना कम होता है।
  • बेर बहुत ही उपयोगी और पोषक तत्वों से भरपूर फल है। 
  • बेर को अधिकतर लोग बचपन में तो बहुत पसंद करते हैं, लेकिन बड़े होने पर इसे नहीं खाते हैं। 
  • एक बड़ा कारण यह भी है कि लोग इसके गुणों से अनजान हैं। 
  • बेर में कार्बोज, प्रोटीन, वसा, थाईमिन, राईबोफ्लेविन, कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस आदि पोषक तत्व उपस्थित होते हैं। 
  • संतरे और नींबू की ही तरह बेर में भी प्रचूर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता है। 
  • बेर में अन्य फलों के मुकाबले विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा होती है। 
  • बेर के सेवन से त्वचा लंबी उम्र तक जवान बनी रहती है। 

कैसे खाएँ बेर?
  • आयुर्वेद के अनुसार बेर हृदय के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। 
  • बेर खाने से बार-बार प्यास लगने की शिकायत नहीं रहती। 
  • बेर को सुखाकर और बारीक पीसकर बनाया गया सत्तू कफ व वायु दोषों का नाश करता है। 
  • बेर को नमक और काली मिर्च के साथ खाने से अपच की समस्या दूर होती है। 
  • बेर को छाछ के साथ लेने से घबराहट, उल्टी और पेटदर्द की समस्या में आराम मिलता है। 

तो आप भी शीतल, दस्तावर और पुष्टिकारक बेर को कभी-कभी अपनी टेस्टफुल मेनू का टेस्ट अवश्य बढ़ाएँ। हाँ, इतना अवश्य ध्यान रहे कि कच्चे बेर पित्तकारक और कफवर्धक होते हैं।
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Sunday, 6 March 2016

मटर का पराठा



    खाने की थाली में जब पराठा आता है तो सबकी रूचि ही बदल जाती है। पराठे का तो स्वाद ही कुछ अलग होता है। नाश्ता में तो सभी को पराठा खाना पसंद है। कोई गोभी, पनीर, मेथी का बनता है तो कोई ड्राई फ्रुटस का। रेसिपी बदलकर बनाये गए पराठे को बच्चें भी खाना पसंद करते है। आज मैं अपनी टेस्टफुल मेनू में मदर का पराठा रखी हूँ। इससे आपके घर के लोगों का टेस्ट चेंज होता तो रहेगा ही, साथ ही आप बच्चों के लंच में दे सकती है। मटर का पराठा खानें में बहुत स्वादिष्ट और स्वास्थ्य-वर्धक होता है। 

    हरी मटर में विटामिन के भरपूर मात्रा में होता है जिससे हड्डियाँ मजबूत होती है। यह ऑस्टियोपोरोसिस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करती है। मटर में लो कैलोरी और लो फैट होता है। हरी मटर में हाई फाइबर होता है जो वजन को बढ़ने से रोकता है। मटर शरीर में मौजूद आयरन, जिंक, मैगनीज और तांबा शरीर को बीमारियों से बचाता है। मटर में ऐसे स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक गुण होते है जो शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ने नहीं देते। हरी मटर में एंटी-ऑक्सीडेंट, फ्लैवानॉइड्स, फाइटोन्यूटिंस, कैरोटिन पाए जाते हैं जो शरीर को यंग और एनर्जी से भरपूर रखते हैं।
आप भी अपनी टेस्टफुल मेनू में मटर का पराठा रखिए और अपने परिवार के स्वास्थ्य और स्वाद को बढ़ाइए। 

मटर का पराठा के लिए आवश्यक सामग्री -
(आटा तैयार कीजिये)
  • गेहूं का आटा - 400 ग्राम (2 कप)
  • घी - छोटे 2 चम्मच


(भरावन के लिए)
  • मटर दाना - 3 कप (उबला हुआ)
  • तेल - 2 चम्मच 
  • हींग - 1/2 चम्मच 
  • अदरक - 1/2 इंच (बारीक कटी हुई)
  • गरम मसाला - 1 चम्मच 
  • नींबू का रस - 2 चम्मच 
  • हरा धनिया - 1/4 कप (बारीक कटा हुआ)
  • हरी मिर्च - 2 (बारीक कटी हुई)
  • घी - पराठा सेकने के लिए 
  • नमक - स्वादानुसार


कैसे बनाएँ मटर का पराठा?
  • सबसे पहलें एक बडे बर्तन में आटा लें और उसमें मैदा, घी डाल कर अच्छी तरह मिलाकर गूँथ लें। 
  • अब गुंथे आटे को आधा ढक कर रख लें। 
  • एक कढाई में तेल गर्म करें। 
  • गर्म हो जाने के बाद उसमें अदरक, कटा हुआ हरी मिर्च और हींग डालकर भूनें। 
  • अब इसमें उबला मटर, गरम मसाला, लाल मिर्च पाउडर, नींबू का रस, धनिया डालकर अच्छी तरह से 2-3 मिनट तक पका लें। 
  • अब गैस बंद कर लें और इसे ठंडा होने दें। 
  • अब आटे की लोई तोड़कर पराठा बनाएँ तथा इसमें मटर का मिश्रण रखें। 
  • अब पराठे को बंद करके बेलन की सहायला से गोल आकार में बेल लें। 
  • बेले हुए पराठे को तवे पर डाल कर धीमी आँच पर दोनों ओर तेल या घी लगाकर सेंक लें। 
  • इस प्रकार सभी पराठे बना लें। 
   अब आपकी टेस्टफुल मेनू के लिए गरमा-गरम मटर का पराठा तैयार है। 
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Sunday, 7 February 2016

वेजिटेबल रोल





 सुबह का नाश्ता या शाम का स्नैक्स, बच्चे तो बच्चे, बड़ों को भी कुछ स्पेशल खाने का मन करता रहता है। मेरे यहाँ तो शाम की चाय पर अवश्य कुछ-न-कुछ चाहिए। बेटे को तो टिफिन में रोज कुछ अलग चाहिए। मैं प्रयास करती रहती हूँ कि उसका स्वाद बदलता रहे। स्वाद बदलने के साथ ही स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हो। मैंने दो दिन पहले ही बेटे के टिफिन में यह वेज रोल रखा था और कल शाम की चाय पर अपनी टेस्टफुल मेनू के लिए वेजिटेबल रोल तैयार किया था। मेरा बेटा हरी सब्जियों को पसंद नहीं करता मगर इस रोल में डाली गईं हरी सब्जियाँ बचती नहीं हैं। इसमें मैंने मनचाहे सब्जियों को डाला जिसे सबने बेहद पसंद किया। मुझे लगता है कि आपको भी एक बार बनाना चाहिए। इसे आप कभी वीकेंड स्पेशल भी बनाकर देखिए, सबको पसंद आएगा। इस रोल को बनाने के आदर्श तरीके बहुत हैं परन्तु मैंने जिस तरह से बनाया, वह तरीका आपको बताती हूँ।

वेजिटेबल रोल के लिए आवश्यक सामग्री - 
  • आटा - 200 ग्राम 
  • पत्ता गोभी - 100 ग्राम (बारीक कतरा हुआ)
  • गाजर  - 100 ग्राम (लंबाई में बारीक कटा हुआ)
  • कच्चा मटर दाना - 100 ग्राम (उबला हुआ)
  • धनिया पत्ता - 1/2 कप (बारीक कटा हुआ)
  • अदरक  - 1/2 इंच लम्बा टुकड़ा (लंबाई में बारीक कटा हुआ)
  • काली मिर्च - एक चैथाई छोटी चम्मच से कम
  • मेयोनीज/मक्खन - 2 चम्मच 
  • सोया सास - एक छोटी चम्मच
  • नमक  - स्वादानुसार 
  • तेल/घी  - वेजिटेबल रोल तलने के लिये

वेजिटेबल रोल कैसे बनाएँ? 
  • किसी बर्तन में आटा को छान कर गूँथ लें।
  • अब वेजिटेबल रोल के अन्दर भरने के लिये पिठ्ठी तैयार करें। 
  • कढ़ाई में 1 चम्मच तेल डालकर गरम करें।
  • अब कढ़ाई में अदरक, कटा हुआ पत्ता गोभी, गाजर और मटर डालें।
  • 1 मिनिट भूनने के बाद उतार लें।
  • अब उसमें काली मिर्च, सोया सास और नमक डालकर ठंडा होने थें।
  • उसमें मेयोनीज/मक्खन डालकर अच्छी तरह मिला लें।
  • अब रोल में भरने के लिये पिठ्ठी तैयार हो गई है।

  • वैसे तो मैदा का रेपर बनाते समय लोग घोल तैयार करते हैं मगर मैं आटा से बना रही हूँ। 
  • आटा को पहले ही गूँथ लिया गया है।
  • अब उस आटे का रोटी बनाएँ।
  • नानस्टिक तवा गरम करें।
  • तवा बहुत अधिक गरम न हो।
  • हल्के आँच पर रोटी को दोनों ओर हाफ सेंक लें।
  • जब रोटी के दोनों ओर का रंग बदल जाय तब निकालकर प्लेट में रख लें।
  • जब रोल के लिए रैपर/रोटी तैयार हो जाए तब उसपर ऊपर की ओर 2 चम्मच पिठ्ठी/वेजिटेबल्स रखें और लंबाई में फैला लें।
  • रैपर/रोटी को पिठ्ठी/वेजिटेबल्स ढकते हुये दायें और बायें दोंनो ओर से थोड़ा-थोड़ा मोड़ लें।
  • अब ऊपर से मोड़ते हुये रोल बनायें।
  • इस प्रकार सभी रोटियों का रोल तैयार कर लें।

  • अब कढाई में तेल डालकर गरम करें।
  • गरम तेल में 2 वेजिटेबल रोल डालकर तलें।
  • वेजिटेबल रोल को पलट-पलट कर ब्राउन होने तक तलें।
  • प्लेट में नेपकिन पेपर बिछाकर वेज रोल कढ़ाई से निकाल कर इस पर रखें।
  • इस प्रकार सभी वेजिटेबल रोल तल कर निकाल लें।

  • इस प्रकार आपकी टेस्टफुल मेनू का टेस्टी वेजिटेबल रोल तैयार है।
  • इसे आप बड़े गर्व से ब्रेकफास्ट, स्नैक्स के रूप में या बच्चे के टिफिन में रख सकती हैं।
  • इसके साथ वीकेंड को स्पेशल बना सकती हैं। 
  • यह आटे से बना है अतः सुपाच्य है और हरी सब्जियों के साथ के कारण स्वास्थ्यवर्धक भी।

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Wednesday, 3 February 2016

शुद्ध घी

    यह तो आप मानते ही हैं कि भारतीय खाने में घी की अपनी अहम भूमिका है। घी न सिर्फ आपके खाने का टेस्ट कई गुना बढ़ा देता है बल्कि इसके एंटी ऑक्सीडेंट्स और जरूरी पोषक तत्त्व आपके स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। आमतौर पर हमारे घरों में बाजार से घी लाया जाता हैं लेकिन बाजार के घी में शुद्धता का खतरा रहता है। हमारे स्वास्थ्य के लिए मिलावटी चीजें फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। अगर आप शुद्ध घी खाना चाहते हैं तो अपने घर पर भी बना सकते हैं। ये बहुत आसान और किफायती है।  

 शुद्ध घी का वैज्ञानिक और धार्मिक आधार भी है। शुद्ध घी में मनुष्य के शरीर में पहुंचे रेडियोधर्मी विकिरणों का दुष्प्रभाव नष्ट करने की असीम क्षमता हैं। अग्नि में शुद्ध घी कि आहुति देने से उसका धुआँ जहाँ तक फैलता है, वहाँ तक का सारा वातावरण प्रदूषण और आण्विक विकरणों से मुक्त हो जाता हैं। सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक चम्मच घी को अग्नि में डालने से एक टन प्राणवायु (ऑक्सीजन) बनती हैं जो अन्य किसी भी उपाय से संभव नहीं हैं।

   शुद्ध घी को रसायन कहा गया है। शुद्ध घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी फूर्तिला हो जाता है। घी में स्वर्ण छार पाए जाते हैं जिसमे अदभुत औषधीय गुण होते है।  शुद्ध घी के सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। मैं हमेशा अपने टेस्टफुल मेनू में रखने के लिए घर पर ही तैयार किया हुआ घी रखती हूँ। आप भी एक बार बनाकर देखिए, आपको आनन्द भी आएगा और शुद्धता की पूरी गारंटी मिलेगी।
शुद्ध घी के लिए आवश्यक सामग्री -
  • मलाई जमा करने के लिए एक कंटेनर
  • एक छननी
  • घी पकाने के लिए बर्तन
  • मक्खन निकालने के लिए मथनी
  • तैयार घी रखने के लिए अलग कंटेनर
शुद्ध घी कैसे बनाएँगे?
  • घर पर घी बनाना वैसे तो काफी आसान है, बस इसके लिए पहले से थोड़ी प्लानिंग की जरूरत होती है। इस बनाने की प्रक्रिया मलाई जमा करने से शुरू होती है। ये मलाई आप दूध या दही से निकालकर एक कंटेनर में जमा करें। 
  • ध्यान रखें की मलाई के कंटेनर को फ्रिज में रखा जाए, ताकि खराब न हो जाए।
  • जब आपकी जरूरत के अनुसार मलाई जमा हो जाए तो उसे एक बड़े बर्तन में पलट लें। 
  • अब मथनी की मदद से मलाई को तब तक फेंटें जब तक कि उसके ऊपर अलग से मक्खन न उतर आए।
  • जाड़े के मौसम में मक्खन निकलने में बिलंब हो तो थोड़ा सा गरम पानी डाल दें। आप देखेंगे कि ऊपर एक बादल जैसी परत बन जाएगी। 
  • अब इस मक्खन की परत को अलग से निकाल लें। 
  • अगर आप चाहें तो इस मक्खन को खाने के लिए इस्तेमाल में ला सकते हैं।
  • अब बची हुई मथी मलाई के बर्तन को गैस पर रखें और पिघलने दें। 
  • कम आंच में रखकर इसमें एक उबाल के साथ सुनहरे-पीले होने तक पकाएँ।
  • उबलते मक्खन को बीच-बीच में चम्मच की सहायता से हिलाते रहें। 
  • अब आपकी टेस्टफुल मेनू के लिए शुद्ध घी तैयार है। 

  • तैयार शुद्ध घी को छानकर स्टील या काँच के कंटेनर में जमने के लिए रख दें और जरूरत पड़ने पर इस खुशबूदार शुद्ध घी का इस्तेमाल करें।
  • निश्चय ही आपकी टेस्टफुल मेनू के स्वाद में चार चाँद लग जाएगा।

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